आलस कथा दसवीं कक्षा के संस्कृत । Alas katha class 10 sanskrit

आलस कथा

कहानी का परिचय :-

यह पाठ विद्यापति द्वारा रचित पुरुषपरीक्षा नामक का उपनिषद का भाग है। पुरुष परीक्षा सरल संस्कृत भाषा में कहानी के रूप में विभिन्न प्रकार के मनुष्य के गुणों के महत्त्व का वर्णन करता है 

और अवगुणों को दूर करने के लिए शिक्षा देता है। विद्यापति लोकप्रिय मैथिली कवि थे।और भी अनेक संस्कृत ग्रंथों के रचनाकार भी विद्यापति थे,

ऐसी उनकी विशेषता संस्कृत विषय में भी अत्यधिक है। प्रस्तुत पाठ में आलस्य नामक अवगुण के निरूपण में व्यंग्य (मजाक) के रूप में कहानी प्रस्तुत है। नीतिकार आलस्य को शत्रु के रूप में मानते हैं।


कहानी

मिथिला में वीरेश्वर नामक मंत्री था। वह स्वभाव से दानी और दयालु था । सभी संकटस्तों को और अनायों को प्रतिदिन भरपेट भोजन दिलवाता था।उसी बीच में आलसियों को भी अन्न, वस्त्र दिलवाता था। 

क्योंकि दुर्गति वालों में सबसे पहला विचार आलसियों का होता है। पेट में लगी आग (भूख) को भी शांत करने के लिए वह कुछ नहीं कर सकता है। 

उसके बाद आलसी पुरूषों के वैसे इच्छित लाभ को सुनकर बहुत से तोंद (पेट) बढ़ाने वाले वहाँ आपस में बातचीत करते हैं।

क्योंकि सुविधाजनक स्थिति सभी जीव चाहते हैं। अपनी जाति के लोगों के सुख को देखकर कौन जीव नहीं दौड़ते हैं।

इसके बाद आलसियों के सुख को देखकर मूर्ति भी बनावटी आलस को दिखाकर भोजन ग्रहण करते हैं।

उसके बाद आलसियों के घर में अधिक धन के खर्च को देखकर उन नियोगी (दयालु) पुरुषों ने विचार किया- अक्षम बुद्धि से, दया से केवल आलसियों को स्वामी वस्तुएँ दिलवाते हैं,

कपट से जो आलसी नहीं है, वे भी ग्रहण करते हैं, ऐसा हमलोगों का आलस (भूल) है। अगर ऐसा होता है तो आलसी पुरूषों की परीक्षा लेते हैं,


ऐसा विचार कर सोये हुए में आलसियों के घर में आग लगाकर उन नियोगी पुरुषों ने निरीक्षण किया।

उसके बाद घर में लगी आग को फैलते हुए देखकर सभी धूर्त भाग गए। बाद में ये आलसी भी भाग गए।

चार पुरुष वहीं सोये हुए आपस में बात-चीत करतेहैं। एक ने वस्तु से मुख को ढककर कहा- अरे! यह शोरगुल क्यों है?

दूसरे ने कहा सोचो कि इस घर में आग लग गयी है। तीसरे ने कहा- कोई भी वैसा धार्मिक व्यक्ति नहीं है जो इस समय हमलोगों को जल से भीगा हुआ कंबल अथवा चटाई से ढँक दे?

चौथे ने कहा- अरे वाचाल! कितनी बात बोलते जाते हो ? चुपचाप क्यों नहीं रहते हो ? उसके बाद चारों आलसियों के आपस में बातचीत को सुनकर और उनके ऊपर फैले हुए आग को गिरते हुए देखकर नियोगी पुरूषों ने मरने के डर से चारों आलसियों को केश (बाल) पकड़कर घर से बाहर किया।

ऐसा देखकर उन नियोगी पुरुषों के द्वारा पढ़ा गया स्त्रियों की गति पति से होती है। बच्चों की गति माता से होती है।

आलसियों की गति किसी भी लोक में दयालुओं के अलावा और किसी से नहीं होती है। बाद में इन चारों आलसियों में उससे भी अधिक वस्तु मंत्री ने दिलवाया ।

कुछ निर्देश :-

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